पश्चिमी चंपारण। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा से स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर करने वाली खबर सामने आई है। यहां बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में नवजात शिशुओं और गंभीर गर्भवती महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से बनाया गया एमएनसीयू (मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट) अब तक मरीजों के लिए पूरी तरह उपयोगी साबित नहीं हो पा रहा है। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस इस यूनिट का नियमित संचालन नहीं होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एमएनसीयू का निर्माण गंभीर स्थिति में नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए किया गया था। इस सुविधा के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को जरूरी चिकित्सा सेवाएं मिलने की उम्मीद थी। इससे मरीजों और उनके परिजनों को बड़े अस्पतालों का चक्कर लगाने से राहत मिल सकती थी। लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों और आवश्यक स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण यूनिट का नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है। नतीजतन, आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित होने के बावजूद इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा का लाभ जरूरतमंद मरीजों को नहीं मिल रहा है। अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण गंभीर हालत में आने वाले नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज के लिए जीएमसीएच बेतिया या अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। समय पर स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई इस यूनिट का संचालन शुरू नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। इस मामले में अस्पताल के लेखपाल सह प्रभारी प्रबंधक मो. शाहनवाज ने बताया कि एमएनसीयू के लिए स्टाफ की पोस्टिंग हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि अगले एक सप्ताह के भीतर यूनिट को सुचारू रूप से चालू कर दिया जाएगा। अब निगाहें अस्पताल प्रबंधन के इस दावे पर टिकी हैं। सवाल यह है कि एमएनसीयू कब पूरी तरह संचालित होगा और क्षेत्र के नवजात शिशुओं तथा गर्भवती महिलाओं को इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा का वास्तविक लाभ कब मिलेगा।