बगहा। पश्चिम चंपारण जिले के बगहा-1 प्रखंड क्षेत्र में सोमवार की रात चंपारण तटबंध टूटने से इलाके में हड़कंप मच गया। गंडक नदी के दबाव के बीच रात करीब 8:30 बजे तटबंध टूटने के बाद पानी तेजी से आसपास के गांवों और निचले इलाकों की ओर फैलने लगा। घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। तटबंध टूटने से बड़ी आबादी के प्रभावित होने की आशंका है। सबसे ज्यादा खतरा निचले और दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को है। पानी का फैलाव बढ़ने की स्थिति में हजारों एकड़ में लगी धान और गन्ने की फसल भी बर्बाद हो सकती है। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने की आशंका है। घटना की सूचना मिलते ही पश्चिम चंपारण की डीएम तरनजोत सिंह और बगहा की एसडीएम चांदनी कुमार मौके पर पहुंचीं। दोनों अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखने की बात कही जा रही है। लेकिन इस घटना ने तटबंध की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि रविवार को ही अधिकारियों की टीम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र और चंपारण तटबंध का निरीक्षण किया था। इसके ठीक अगले दिन तटबंध टूटने से ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर तटबंध की सुरक्षा को लेकर की गई तैयारियां कितनी प्रभावी थीं? क्या समय रहते जरूरी मरम्मत और निगरानी की गई थी? कुछ लोग घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि, तटबंध टूटने के पीछे किसी साजिश, भ्रष्टाचार या अधिकारियों की लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन प्रभावित लोगों और उनकी फसलों को कितना नुकसान होने से बचा पाता है।