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मुस्लिम समाज के संकल्प से लाखों गाय बचीं, सरकार ने नहीं की सराहना: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पूरनपुर। नगर के एक होटल में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पत्रकारों से बातचीत में गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग दोहराई और सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस सरकार ने गाय के नाम पर वोट लेकर सत्ता हासिल की, वही आज इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। उनका आरोप था कि गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग लंबे समय तक मुस्लिम विरोध के नाम पर टाली गई।शंकराचार्य ने कहा कि 78 वर्ष बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने भी गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग का समर्थन किया तथा गाय न खरीदने और न काटने का संकल्प लिया। उन्होंने दावा किया कि इस संकल्प का पालन भी किया गया, जिससे ईद के अवसर पर लाखों गाय कटने से बच गईं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सरकार ने इस पहल की कोई सराहना नहीं की। उन्होंने कहा कि जब वेद-पुराणों में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, तो केंद्र और राज्य सरकार को इसे राष्ट्रीय माता घोषित करने में क्या आपत्ति है। उन्होंने कहा कि अब सभी समाज के लोग इस मुद्दे पर साथ आ रहे हैं और वे अपने मतदान का उपयोग उसी दल के समर्थन में करेंगे जो गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करेगा। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जब संत लोभ-मोह त्यागकर भगवान की आराधना के लिए जीवन समर्पित करता है, तो उसे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने की आवश्यकता क्यों पड़ती है।
मुस्लिम समाज के संकल्प से लाखों गाय बचीं, सरकार ने नहीं की सराहना: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पूरनपुर। नगर के एक होटल में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पत्रकारों से बातचीत में गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग दोहराई और सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस सरकार ने गाय के नाम पर वोट लेकर सत्ता हासिल की, वही आज इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। उनका आरोप था कि गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग लंबे समय तक मुस्लिम विरोध के नाम पर टाली गई।शंकराचार्य ने कहा कि 78 वर्ष बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने भी गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग का समर्थन किया तथा गाय न खरीदने और न काटने का संकल्प लिया। उन्होंने दावा किया कि इस संकल्प का पालन भी किया गया, जिससे ईद के अवसर पर लाखों गाय कटने से बच गईं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सरकार ने इस पहल की कोई सराहना नहीं की। उन्होंने कहा कि जब वेद-पुराणों में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, तो केंद्र और राज्य सरकार को इसे राष्ट्रीय माता घोषित करने में क्या आपत्ति है। उन्होंने कहा कि अब सभी समाज के लोग इस मुद्दे पर साथ आ रहे हैं और वे अपने मतदान का उपयोग उसी दल के समर्थन में करेंगे जो गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करेगा। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जब संत लोभ-मोह त्यागकर भगवान की आराधना के लिए जीवन समर्पित करता है, तो उसे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने की आवश्यकता क्यों पड़ती है।
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