कचरे के ढेर में मृत नंदी! वार्ड 29 में जेसीबी से निस्तारण का वीडियो वायरल, नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल एंकर: धौलपुर शहर के वार्ड नंबर 29 से सामने आए एक वीडियो ने मृत गोवंश के निस्तारण की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक मृत नंदी को जेसीबी मशीन की मदद से उठाकर ले जाते हुए कुछ लोग दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि मृत नंदी को कचरे के ढेर में डाला गया। हालांकि वीडियो के आधार पर यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है कि अंतिम रूप से मृत पशु को कहां और किस प्रक्रिया से निस्तारित किया गया। मामले में नगर परिषद और संबंधित पार्षद का पक्ष भी सामने आना बाकी है। धौलपुर के वार्ड नंबर 29 में मृत नंदी के निस्तारण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक जेसीबी मशीन से मृत नंदी को उठाकर ले जाते हुए कुछ युवक नजर आ रहे हैं। वीडियो को लेकर स्थानीय लोगों की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि मृत नंदी को कचरे के ढेर में डाला गया। यदि ऐसा हुआ है तो यह मृत पशु के उचित निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। कानूनी पहलू भी समझिए— राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 280 के तहत मृत पशु के शव के निस्तारण की व्यवस्था नगरपालिका स्तर पर की जाती है। किसी व्यक्ति के कब्जे में पशु की मृत्यु होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शव को निर्धारित स्थान तक पहुंचाना या नगरपालिका को इसकी सूचना देना होता है। नियमों का पालन नहीं करने पर एक हजार से दो हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। इसी अधिनियम में नगरपालिका को मृत पशुओं के शवों के निस्तारण और संबंधित स्थानों की व्यवस्था को विनियमित करने की शक्ति भी दी गई है। इसके अलावा, यदि मृत पशु को इस तरह खुले में छोड़ने से सार्वजनिक उपद्रव या स्वास्थ्य संबंधी समस्या पैदा होती है, तो परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता की धारा 292 समेत अन्य लागू प्रावधानों की जांच की जा सकती है। वहीं किसी धार्मिक भावना को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से ठेस पहुंचाने का आरोप हो तो BNS की धारा 299 का सवाल भी परिस्थितियों और जांच के तथ्यों पर निर्भर करेगा। हालांकि केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। पूरे मामले में यह भी जांच का विषय है कि