हिंदी की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी बांका में हिंदी पखवाड़ा सह पुस्तक लोकार्पण समारोह आयोजित, साहित्यकारों को सम्मान और विद्यार्थियों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां गोपाल जी कश्यप बांका। हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का महत्वपूर्ण माध्यम है। हिंदी की साहित्यिक समृद्धि को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और विद्यार्थियों में साहित्य के प्रति रुचि जगाने के उद्देश्य से बांका जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से आनंद कॉलोनी स्थित आइडियल एकेडमी परिसर में हिंदी पखवाड़ा सह पुस्तक लोकार्पण, व्याख्यान एवं कविता पाठ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई विद्वानों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अचल भारती ने की, जबकि मुख्य अतिथि एसएम कॉलेज, भागलपुर की प्राध्यापिका डॉ. किरण कुमारी रहीं। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. अमर पंकज, कुंज बिहारी दास और डॉ. गिरजा शंकर मोदी शामिल हुए। कार्यक्रम की व्यवस्था शंकर दास एवं आइडियल एकेडमी के प्रोपराइटर मनोज जी ने की, जबकि मंच संचालन डॉ. नवीन निकुंज ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचस्थ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। एंबीशन पब्लिक स्कूल, चौतरा की छात्राओं अन्नू सिंह, पंखुड़ी दीप, प्रिया एवं सिमरन ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। बीना पब्लिक स्कूल, खिड्डी, रजौन की छात्राओं ने स्वागत गीत पर भाव नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं एंबीशन पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। चार पुस्तकों का हुआ लोकार्पण समारोह के दौरान साहित्यकारों की चार पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इनमें सुरेंद्र प्रसाद यादव की अंगिका उपन्यास ‘हिरवा’, अंगिका कहानी संग्रह ‘मूलगैन’, कुमार संभव की दोहा संग्रह ‘तन चंदन टेसू हृदय’ तथा श्रीधर यादव की धार्मिक पुस्तक ‘पंच परमेश्वरी दिव्य दर्शन’ शामिल हैं। मंचस्थ विद्वानों ने पुस्तकों के साहित्यिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए अंगिका एवं हिंदी साहित्य के विकास में ऐसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। साहित्य और चिकित्सा क्षेत्र की विभूतियां सम्मानित समारोह में साहित्य एवं अन्य क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले लोगों को विभिन्न सम्मा