पश्चिमी चंपारण के बगहा नगर परिषद क्षेत्र में ‘हर घर नल का जल’ योजना की जमीनी हकीकत लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। वार्ड संख्या 28 स्थित अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में लाखों रुपये की लागत से बनी जल मीनार लंबे समय से बंद पड़ी है। जल मीनार के आसपास झाड़ियां और घास-फूस उग आए हैं। परिसर की हालत देखकर साफ लगता है कि लंबे समय से इसकी समुचित देखरेख नहीं हुई है। इस जल मीनार से वार्ड 28 और 30 के लोगों को पेयजल की आपूर्ति की जाती थी, लेकिन वर्ष 2024 से जलापूर्ति बंद होने की बात स्थानीय लोगों ने बताई है। पानी की सप्लाई ठप होने के बाद दोनों वार्डों के लोगों को निजी स्तर पर पानी खरीदना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, 20 से 30 रुपये खर्च कर पानी खरीदना उनकी मजबूरी बन गई है। रोजाना पानी खरीदने का खर्च गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। पाइपलाइन बिछी, लेकिन नलों में नहीं आया पानी स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजना के तहत पाइपलाइन और जल मीनार का निर्माण होने के बाद घर-घर पानी पहुंचने की उम्मीद थी। लेकिन कई जगह पाइपलाइन बिछने के बावजूद लोगों को नियमित जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल सका। वार्ड 30 निवासी अशोक दास ने बताया कि वर्ष 2024 से जल मीनार से पानी की आपूर्ति बंद है। उन्होंने इसके लिए नगर परिषद की जिम्मेदारी तय की। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सरोज कुमार बैठा ने बताया कि जल मीनार के सभी उपकरण जल चुके हैं। नए सिरे से टेंडर कराया जा रहा है। करीब दो महीने पहले ही जल मीनार नगर परिषद के नियंत्रण में आई है। उपकरण दुरुस्त कराने के बाद जलापूर्ति बहाल करने की कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि दो वार्डों के लोगों को पानी के संकट से कब राहत मिलती है।