राजस्थान। आर.जे. रमेश खड़े ने रविवार को नेशनल मीडिया न्यूज एजेंसी की टीम के साथ बातचीत के दौरान अपने जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि बचपन में हुई एक घटना ने उनके जीवन की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद रेडियो के प्रति उनका लगाव बढ़ा और आगे चलकर यही रुचि उन्हें ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ने की ओर ले गई। रमेश ने अपने शुरुआती जीवन को याद करते हुए बताया कि जब वे 8वीं कक्षा में पढ़ते थे, तब एक शाम गांव के खेल मैदान में बच्चों के साथ खेल रहे थे। इसी दौरान उन्हें सफेद साड़ी पहने कुछ बहनें दिखाई दीं। उन्होंने बताया कि वे बहनें वहां कुछ संदेश दे रही थीं। उन संदेशों का रमेश के मन पर गहरा प्रभाव पड़ा और उनके भीतर आध्यात्मिक विचारों के प्रति रुचि पैदा हुई। उन्होंने बताया कि पढ़ाई और जीवन के सफर के दौरान उनका रेडियो के प्रति विशेष लगाव रहा। इसी रुचि को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने रेडियो की ट्रेनिंग ली। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें इसका प्रमाण-पत्र भी मिला। इस दौरान उन्होंने मुंबई स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल में केमिस्ट के रूप में काम किया। रमेश के अनुसार, रेडियो की ट्रेनिंग और आध्यात्मिक विचारों से बढ़ती नजदीकी के बीच उनका संपर्क ब्रह्माकुमारी संस्था से हुआ। इसके बाद उन्होंने संस्था से जुड़ने का निर्णय लिया और लगातार अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं। बातचीत के दौरान रमेश ने कहा कि जीवन में कई बार छोटी-सी घटना भी व्यक्ति की सोच और भविष्य की दिशा को प्रभावित कर देती है। उनके जीवन में भी बचपन में मिली प्रेरणा, रेडियो के प्रति रुचि और आध्यात्मिक जुड़ाव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।रमेश आज ब्रह्माकुमारी संस्था के साथ जुड़े रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और लोगों तक सकारात्मक सोच, आध्यात्मिकता और जीवन मूल्यों से जुड़े संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।