भिवानी। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुष 60 किलोग्राम मुक्केबाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले हरियाणा के होनहार मुक्केबाज सचिन सिवाच का पैतृक गांव मिताथल पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। गांव की सीमा पर सैकड़ों ग्रामीणों, युवाओं, खेल प्रेमियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और भारत माता के जयघोष के साथ सचिन सिवाच का अभिनंदन किया। पूरे गांव में विजय जुलूस निकाला गया, जिसमें लोगों ने तिरंगा लहराकर अपने चैंपियन का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने कहा कि सचिन सिवाच ने अपनी मेहनत, अनुशासन और लगन से न केवल मिताथल और भिवानी, बल्कि पूरे हरियाणा और देश का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया है। युवाओं को उनसे प्रेरणा लेकर खेलों में आगे बढ़ना चाहिए। सचिन सिवाच ने अपने स्वागत से अभिभूत होकर कहा कि यह स्वर्ण पदक पूरे देश, हरियाणा और उनके गांव के लोगों को समर्पित है। उन्होंने कहा कि परिवार, कोच और देशवासियों के समर्थन से ही यह उपलब्धि संभव हो सकी। उनका लक्ष्य अब आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत के लिए पदक जीतना है। उल्लेखनीय है कि सचिन सिवाच ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के फाइनल मुकाबले में शानदार वापसी करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया और भारत को मुक्केबाजी में एक और गोल्ड दिलाया। उन्होंने कहा कि अब वे एशियन गेम्स व ओलंपिक खेलों की तैयारी पटियाला में करेंगे, जो कमी इस बार रही हैं वो न हो उसके लिए कड़ा अभ्यास करेंगे। कोच टेकराम के सम्मान शब्द: सचिन ने जो गलती की है वो दुबारा नहीं हो उस पर हमारा फोकस रहेगा। उन्होंने कहा कि मैच का समय कुछ गलती देखने को मिली थी, उन्हें ठीक किया जाएगा। "सचिन सिवाच ने वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के दम पर यह स्वर्ण पदक जीता है। उसने साबित कर दिया कि यदि खिलाड़ी लक्ष्य तय कर निरंतर मेहनत करे तो कोई भी मुकाम दूर नहीं होता। मुझे अपने शिष्य पर गर्व है। उम्मीद है कि सचिन आने वाले ओलंपिक और विश्व प्रतियोगिताओं में भी भारत का तिरंगा बुलंद करेगा।" कोच टेकराम व सचिन के करीबी अशोक सिवाच ने कहा कि "सचिन सिवाच ने गांव मिताथल, भिवानी और पूरे हरियाणा का मान बढ़ाया है। यह स्वर्ण पदक केवल सचिन की नहीं, बल्कि पूरे देश की जीत है। उसकी सफलता आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है।