भिवानी। ब्रह्माकुमारीज़ दिव्य भवन, रुद्रा कॉलोनी, भिवानी में रविवार को "एक शाम शिव के नाम" संगीत संध्या कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में चंडीगढ़ से प्रसिद्ध भजन गायक जय गोपाल लुथरा व छोटी काशी से भजन गायक रामोवतार मरवाल ने विशेष रूप से शिरकत कर अपने मधुर और मनमोहक भजनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु भजनों पर झूम उठे और पूरा वातावरण शिवमय हो गया। नोएडा से आई बी के लीना बहन ने बखूबी मंच संचालन किया। इस अवसर पर बीके रजनी बहन ने बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं संस्कार निर्माण पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि छोटे-छोटे बच्चों को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए केवल अनुशासन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रेम, धैर्य और अच्छे संस्कारों की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को जबरदस्ती से बदलने का प्रयास लंबे समय तक सफल नहीं होता। यदि बच्चों को प्यार से समझाया जाए, उनका मार्गदर्शन किया जाए तथा अभिभावक स्वयं आदर्श प्रस्तुत करें, तो बच्चे सहज रूप से सही राह पर चलने लगते हैं। उन्होंने कहा कि सही और गलत का वास्तविक ज्ञान अनुभव, अभ्यास और आत्मचिंतन से प्राप्त होता है। इसलिए घर पर नियमित रूप से सकारात्मक चिंतन और मेडिटेशन का अभ्यास करना चाहिए। इसके लिए प्रतिदिन किसी विशेष स्थान पर जाना आवश्यक नहीं है। यदि समय की कमी हो तो सप्ताह में एक बार अथवा दस दिनों में एक बार केंद्र पर आ सकते हैं, लेकिन घर पर नियमित ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास अवश्य करना चाहिए। बीके रजनी बहन ने कहा कि ध्यान मन को शांत करता है, सोच को सकारात्मक बनाता है तथा सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। जब माता-पिता स्वयं ध्यान और आत्मचिंतन को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हैं तो बच्चे भी उनके व्यवहार और जीवनशैली से प्रेरणा लेकर अच्छे संस्कार ग्रहण करते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को सही राह पर ले जाने का मूल मंत्र प्रेम, धैर्य, सकारात्मक वातावरण और नियमित अभ्यास है। यदि अभिभावक स्वयं इन मूल्यों का पालन करते हुए बच्चों का स्नेहपूर्वक मार्गदर्शन करें, तो वे निश्चित रूप से संस्कारी, जिम्मेदार और आदर्श नागरिक बनेंगे।