बिहार ब्लॉक में 'सेट कमीशन' पर भुगतान का आरोप, प्रधानों में आक्रोश; जांच के आदेश बिहार, प्रतापगढ़। विकासखंड बिहार में मनरेगा भुगतान को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। ब्लॉक के कई ग्राम प्रधानों ने एपीओ के.के. मिश्रा और एडीओ आईएसबी सुरेंद्र नाथ की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि मनरेगा के भुगतान कथित रूप से "सेट कमीशन" के आधार पर कराए जा रहे हैं। आरोपों के बाद ब्लॉक परिसर और ग्रामीण क्षेत्रों में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्रधानों का कहना है कि बिना कथित कमीशन के भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जबकि कथित रूप से रकम तय होने के बाद ही फाइलों को आगे बढ़ाया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और मामले की आधिकारिक जांच अभी शेष है। सूत्रों के अनुसार, आरोप सार्वजनिक होने के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आरोप लगाने वाले एक ग्राम प्रधान का भुगतान रोकने या निरस्त कराने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इस संबंध में भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि एपीओ के.के. मिश्रा का नाम पूर्व में भी विभिन्न विवादों और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि आरोप असत्य हों तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाए। क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी? जब इस मामले में एपीओ के.के. मिश्रा से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा, "प्रधान अपने बच्चों की कसम खा लें, हम मान जाएंगे।" वहीं एडीओ आईएसबी सुरेंद्र नाथ से जानकारी ली गई तो उन्होंने अपना पक्ष रखा। उधर खंड विकास अधिकारी शिव बहादुर सिंह ने बताया, "मैं नया हूं। अभी मामले की जानकारी मिली है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।" अब सभी की निगाहें प्रस्तावित जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला ब्लॉक स्तर पर भ्रष्टाचार के बड़े प्रकरण के रूप में सामने आ सकता है, वहीं जांच से आरोप गलत साबित होने पर स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।