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▶️.....आज मदीना की उस वादी में एक बार फिर जाने का मौक़ा मिला जहाँ परिंदे भी मोहब्बत का इज़हार करते नज़र आते हैं।*
Indra Kumar Singh
(UTTAR PRADESH, BARABANKI)
▶️.....आज मदीना की उस वादी में एक बार फिर जाने का मौक़ा मिला जहाँ परिंदे भी मोहब्बत का इज़हार करते नज़र आते हैं।*
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Comments (1)
Indra Kumar Singh
21 Jun, 2026▶️.....आज मदीना की उस वादी में एक बार फिर जाने का मौक़ा मिला जहाँ परिंदे भी मोहब्बत का इज़हार करते नज़र आते हैं।* मोहब्बत अल्लाह की ऐसी नेमत है जिसे परिंदे, जानवर और इंसान सब समझते हैं। मगर अजीब बात यह है कि परिंदे मोहब्बत में वफ़ा निभाते हैं, जबकि इंसान कभी-कभी मोहब्बत को भी अपने फ़ायदे का ज़रिया बना लेता है। परिंदे मोहब्बत करते हैं, मगर बदले की उम्मीद नहीं रखते। साथ निभाते हैं, मगर एहसान नहीं जताते। उनके पास अक़्ल नहीं, फिर भी मोहब्बत में सच्चाई है; और इंसान के पास अक़्ल है, मगर कभी-कभी मोहब्बत में ख़ुलूस कम पड़ जाता है। कभी-कभी लगता है कि इंसान को मोहब्बत का सबक़ बड़ी-बड़ी किताबों से पहले अल्लाह की इन छोटी-सी मख़लूक़ात से सीखना चाहिए। क्योंकि जहाँ स्वार्थ ख़त्म होता है, वहीं से सच्ची मोहब्बत शुरू होती है। *-मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा*