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➡️.....बरहिया में राशन घोटाला! कोटेदार की मिलीभगत से गरीबों के हक पर डाका*
Indra Kumar Singh
(UTTAR PRADESH, BARABANKI)
➡️.....बरहिया में राशन घोटाला! कोटेदार की मिलीभगत से गरीबों के हक पर डाका*
बौंसी मारवाड़ी महिला समिति का कार्यक्रम
UP के प्रतापगढ़ जिले से दिनभर की बड़ी खबरें। 01/05/2026 #pratapgarh #latestnews @reporteJitendra
किरीट सोमय्या यांनी विमानत ळावरून हातकलंगडे पोलीस स्टेशन, शिरोली पोलीस स्टेशन , शिरोली गावात तसेच एसपी ऑफिस मध्ये जाऊन लवजिहाद गुन्ह्याची सवीस्तर आढावा घेतला.व सुचना केल्या.
मां संतोषी मंदिर जीर्णोद्धार एवं प्राण प्रतिष्ठा#Giridih
कोल्हापूर मधील लवजिहाद प्रकरणी अत्याचारीताची चौकशी तसेच एस.पी ऑफिस मध्ये आ.गोपिनाथ पडळकर यांनी संघटीत गुन्हेगारी व मुळापर्यंत चौकशी बाबत चर्चा केली.
पालकमंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले यांनी महाराष्ट्र दिनाच्या लातूरकराना दिल्या शुभेच्छा
छत्रपती शिवाजी महाराज यांच्या शौर्य गाथेवर राजा शिवाजी चित्रपट बनवला,अभिनेते रितेश देशमुख यांची पहिली प्रतिक्रिया
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संजना पुत्री राजकुमार निवासी कॉल की राघढ़ के साथ हुई मारपीट चचेरे भाई सोनू ने लात और घुसो के साथ की मारपीट पुलिस
हिरण को बचाने के चक्कर में गिरे पूर्व जिला परिषद, हालत गंभीर।
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Indra Kumar Singh
11 Apr, 2026➡️......बरहिया में राशन घोटाला! कोटेदार की मिलीभगत से गरीबों के हक पर डाका* मैहर (बरहिया ग्राम पंचायत) मैहर जिले की ग्राम पंचायत बरहिया से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले राशन में खुला खेल जारी है। आरोप है कि कोटेदार और उसके कर्मचारी की मिलीभगत से हितग्राहियों को कम तौलकर अनाज दिया जा रहा है। वीडियो में खुली पोल स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डिजिटल युग में भी पुराने तराजू-बांट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, तौल के दौरान कर्मचारी हाथ से कांटा दबाकर वजन कम कर देता है। जिस पल्ले में बांट रखा है, उसे ठीक से उठाया तक नहीं जाता—यानी तौल की पूरी प्रक्रिया ही संदिग्ध है। डर के साये में गरीब हितग्राही सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सब कुछ खुलेआम होने के बावजूद गरीब हितग्राही विरोध नहीं कर पा रहे हैं। कारण चाहे डर हो या निर्भरता, लेकिन उनके हक का अनाज दिनदहाड़े छीना जा रहा है। नाप-तौल विभाग की चुप्पी पर सवाल इस पूरे मामले में नाप-तौल विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। विभाग का काम है बाजारों, दुकानों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में इस्तेमाल हो रहे उपकरणों की जांच करना, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी लगभग शून्य नजर आती है। क्या विभाग केवल कागजों तक सीमित रह गया है? क्या अधिकारियों को ग्रामीण इलाकों की सुध लेने की फुर्सत नहीं? बड़ा सवाल: जब सरकार पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था की बात करती है, तो आखिर जमीनी स्तर पर यह लापरवाही और भ्रष्टाचार क्यों? मांग: स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों का हक सुरक्षित रह सके।