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▶️......छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला के* *‘रहस्यमयी’ निरई दरबार* में* जब* ‘*प्रोटोकॉल*’ ने टेका* मत्था*, *कलेक्टर ने आम* *श्रद्धालु की तरह कतार में* लगकर किए दर्शन…**
Indra Kumar Singh
(UTTAR PRADESH, BARABANKI)
▶️......छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला के* *‘रहस्यमयी’ निरई दरबार* में* जब* ‘*प्रोटोकॉल*’ ने टेका* मत्था*, *कलेक्टर ने आम* *श्रद्धालु की तरह कतार में* लगकर किए दर्शन…**
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श्रीमद्भागवत जी श्लोक संख्या 7 /6 / 1
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Indra Kumar Singh
23 Mar, 2026▶️......छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला के* रहस्यमयी’ निरई दरबार* में* जब* ‘*प्रोटोकॉल*’ ने टेका* मत्था*, *कलेक्टर ने आम* *श्रद्धालु की तरह कतार में* लगकर किए दर्शन… साल के 364 दिन सूना रहने वाला वनांचल का वह कोना आज भक्ति के उफान से सराबोर था. धमतरी के सुप्रसिद्ध निरई माता मंदिर के कपाट जैसे ही खुले, श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा. लेकिन इस साल की सबसे बड़ी सुर्खी माता की महिमा के साथ-साथ जिले के मुखिया यानी कलेक्टर की वह ‘सादगी’ रही, जिसने सत्ता की चमक को भक्ति के आगे बौना साबित कर दिया. अमूमन लाल बत्ती और सुरक्षा घेरे में रहने वाले प्रशासनिक गलियारों की रवायत यहाँ बदल गई. धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने किसी विशेष सुविधा या ‘VIP’ दर्शन के मोह को त्याग कर, घंटों तक आम श्रद्धालुओं के साथ लंबी कतार में पसीना बहाया. चिलचिलाती धूप और पथरीले रास्तों पर आम आदमी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी बारी का इंतजार करना, क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. यह नजारा उस वक्त दिखा जब हजारों की भीड़ माता के दर्शन को बेताब थी. कलेक्टर के साथ कुरुद एसडीएम नभसिंह कोशले भी इस दिव्य दर्शन के साक्षी बने. पहाड़ों की गोद में ‘अघोषित’ परंपराएं और रहस्य निरई माता का दरबार अपनी उन कठोर और अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है, जो आज के आधुनिक युग में भी अचंभित करती हैं. वर्जित है महिलाओं का प्रवेश: यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मंदिर परिसर में महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है. श्रृंगार नहीं, श्रद्धा सर्वोपरि: माता के इस दरबार में सिंदूर, सुहाग सामग्री या वस्त्र नहीं चढ़ाए जाते. यहाँ केवल नारियल और अगरबत्ती की खुशबू ही फिजाओं में तैरती है. एक दिन का राज: साल में केवल चैत्र नवरात्रि के एक विशेष दिन ही यहाँ माता के दर्शन सुलभ होते हैं, जिसके लिए लोग साल भर पलकें बिछाए इंतजार करते हैं. सुरक्षा के चक्रव्यूह के बीच आस्था की जीत श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए थे. खुद कलेक्टर की मौजूदगी ने न केवल व्यवस्थाओं की हकीकत जांची, बल्कि आम जनता को यह संदेश भी दिया कि नियम और कतारें सबके लिए बराबर हैं.