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देश के करीब साढ़े तीन करोड़ लोग भारत से बाहर दूसरे देशों में रहते हैं. उनका कहना था कि ऐसे अधिकांश लोगों के मां-बाप या सास-ससुर भारत में ही रहते हैं. उन्होंने कहा कि भारत से बाहर रह रहे लोग केवल अपनी योग्यता के आधार पर ही वहां नहीं पहुंचे हैं. उनका कहना था कि इसके पीछे उनके मां-बाप का त्याग और तपस्या भी है.उन्होंने कहा का इन लोगों के मां-बाप ने अपना पेट काटकर और अपना सुख त्याग कर उन्हें इस लायक बनाया है.उन्होंने कहा कि कभी-कभी तो मां-बाप अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए अपनी जमीन-जायजाद भी बेच देते हैं. .उन्होंने कहा कि उनकी सफलता के पीछे सरकारों की सस्ती शिक्षा और स्वास्थ्य की योजनाओं का भी हाथ है. उन्होंने कहा कि ये लोग जब विदेश जाते हैं तो शुरू-शुरू में अपने मां-बाप की चिंता करते हैं. उनके वहां जब बच्चे होते हैं तो वे अपने मां-बाप या सास-ससुर को बच्चों की देखभाल के लिए अपने पास बुला लेते हैं. इसके पीछे की वजह यह होती है कि वहां बच्चों की देखभाल करने वाले लोगों की फीस काफी अधिक होती है. उन्होंने कहा कि समय बीतने के साथ-साथ इन लोगों को लगाव अपने मां-बाप या सास-ससुर के साथ घटता चला जाता है. डॉक्टर अग्रवाल ने अपनी बातों के समर्थन में दिल्ली और इंदौर में हाल में हुई घटनाओं की जिक्र किया. जिसमें अकले रह रहे मां-बाप की मौत हो गई. लेकिन उनकी संतान लौटकर नहीं आई. उन्होंने बताया कि देश में हर साल इस तरह की करीब पांच सौ मामले सामने आते हैं, जिसमें अकेले रह रहे मां-बाप की मौत बहुत पीड़ादायक होती है.* ▶️part 2◀️
Indra Kumar Singh
(UTTAR PRADESH, BARABANKI)
देश के करीब साढ़े तीन करोड़ लोग भारत से बाहर दूसरे देशों में रहते हैं. उनका कहना था कि ऐसे अधिकांश लोगों के मां-बाप या सास-ससुर भारत में ही रहते हैं. उन्होंने कहा कि भारत से बाहर रह रहे लोग केवल अपनी योग्यता के आधार पर ही वहां नहीं पहुंचे हैं. उनका कहना था कि इसके पीछे उनके मां-बाप का त्याग और तपस्या भी है.उन्होंने कहा का इन लोगों के मां-बाप ने अपना पेट काटकर और अपना सुख त्याग कर उन्हें इस लायक बनाया है.उन्होंने कहा कि कभी-कभी तो मां-बाप अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए अपनी जमीन-जायजाद भी बेच देते हैं. .उन्होंने कहा कि उनकी सफलता के पीछे सरकारों की सस्ती शिक्षा और स्वास्थ्य की योजनाओं का भी हाथ है. उन्होंने कहा कि ये लोग जब विदेश जाते हैं तो शुरू-शुरू में अपने मां-बाप की चिंता करते हैं. उनके वहां जब बच्चे होते हैं तो वे अपने मां-बाप या सास-ससुर को बच्चों की देखभाल के लिए अपने पास बुला लेते हैं. इसके पीछे की वजह यह होती है कि वहां बच्चों की देखभाल करने वाले लोगों की फीस काफी अधिक होती है. उन्होंने कहा कि समय बीतने के साथ-साथ इन लोगों को लगाव अपने मां-बाप या सास-ससुर के साथ घटता चला जाता है. डॉक्टर अग्रवाल ने अपनी बातों के समर्थन में दिल्ली और इंदौर में हाल में हुई घटनाओं की जिक्र किया. जिसमें अकले रह रहे मां-बाप की मौत हो गई. लेकिन उनकी संतान लौटकर नहीं आई. उन्होंने बताया कि देश में हर साल इस तरह की करीब पांच सौ मामले सामने आते हैं, जिसमें अकेले रह रहे मां-बाप की मौत बहुत पीड़ादायक होती है.* ▶️part 2◀️
फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट करने पर कार्रवाई थाना कांट क्षेत्र में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर आपत्तिजनक एवं धमकीपूर्ण पोस्ट प्रसारित करने का मामला सामने आया। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए आवश्यक विधिक कार्रवाई की। क्षेत्राधिकारी सदर ने बताया कि मामले की जांच कर दोषी के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
A शाहजहांपुर विधानसभा 132 अपूर्ण ठाकुर जलालाबाद अपने कार्यालय पर प्रेस वार्ता की
मवेशी को लेकर केनुआर में भड़का विवाद, दो पक्ष भिड़े; गाली-गलौज के बाद लाठी-डंडे चले, दोनों तरफ से एक-एक घायल:आनंदपुर
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थाना काकरोली में किराना दुकानदार के साथ मारपीट के में हुई गिरफ्तारी की जानकारी देते ssp ग्रामीण
केरल- एर्नाकुलम जिले के अंगमाली स्थित किडांगूर महाविष्णु मंदिर में उत्सव के दौरान मय्यनाड पार्थसारथी नाम का हाथी अचानक मस्त अवस्था में बेकाबू हो गया, हाथी ने वाहनों को उठाकर फेंका और मंदिर परिसर में भारी तोड़फोड़ की, इस दौरान कोल्लम निवासी ट्रक चालक विष्णु की कुचलकर मौत हो गई जबकि मुख्य महावत प्रदीप गंभीर रूप से घायल हो गए, वन विभाग और पुलिस ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद हाथी को काबू में किया
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