Now Playing
"क्या जाति है या कोई जाति नहीं है?" क्या यह आदर्श वाक्य इस मामले में उपयुक्त है?#latest_news
Ashok Pawar MD
(MAHARSHATRA, MUMBAI CITY)
"क्या जाति है या कोई जाति नहीं है?" क्या यह आदर्श वाक्य इस मामले में उपयुक्त है?#latest_news
रुड़की! टोल प्लाजा पर लगे जाम को लेकर आग बबूला हुए विधायक फुरकान अहमद! खुलवाया जाम!
▶️.....ऋषिकेश में एक हरियाणा नंबर कार में तेज आवाज में गाने बज रहे थे, जिसको लेकर पुलिस ने उन्हें रोका, तो मामला बिगड़ गया। कार में लड़के और लड़कियां सवार थी। आरोप है कि जब पुलिस ने उन्हें रोको तो युवतियाँ पुलिसकर्मियों से उलझ गईं और अभद्रता करने लगी। वहीं पर्य़टकों का आरोप है कि पुलिस ने लड़कियों से अभद्रता की।
गैस सिलेंडर से लीकेज चेक करते समय हुआ बड़ा धमाका, व्यक्ति समेत घर के कई लोग आग से झुलसे
फांसी के फंदे पर लटका मिला युवक का शव, परिजनों ने लगाया पत्नी पर हत्त्या का आरोप, आखिर क्यों युवक को उतारा मौत के घाट
संदिग्ध परिस्थितियों में युवक की मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप
शादीशुदा प्रेमिका से मिलने गए युवक को, ससुरालयों ने पकड़ा रंगे हाथ, प्रेमी की कि जमकर पिटाई हुई मौत
कोटवां नरायनपुर में कटान की बढ़ती सम्भावना को लेकर पूर्व मंत्री नारद राय ने ग्रामीणों के साथ DM को सौंपा पत्रक
मोदी सरकारची १२ वर्षांची विकासगाथा | गडचिरोलीत विशेष पत्रकार परिषद राज्यसभा खासदार मा मायाताई ईवनाथे यांची ऊपस्थीती
दिव्यांग बांधवाच्या साखळी उपोषणाला आमदार डॉ मिलिंद नरोटे यांची भेट
चांदन सहयोग शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे राजस्व मंत्री, प्रशासनिक अमला रहा अलर्ट
Comments (1)
Ashok Pawar MD
20 May, 2025"Is there a caste or is there no caste?" Is this motto appropriate in this case? हाल ही में चर्चा का विषय बने एक मामले में, जब भारत के मुख्य न्यायधीश (CJI) ने महाराष्ट्र में प्रोटोकॉल की अनदेखी का सामना किया, तो यह सवाल उठता है – क्या जाति और कार्य कारण संबंध में कोई फर्क है? CJI, जो दलित समाज से आते हैं, को महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल का सम्मान नहीं दिया गया। यह घटना न केवल एक अहम राजनैतिक और सामाजिक मुद्दा बन गई, बल्कि इसने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या किसी व्यक्ति की जाति उनके कार्य, अधिकार और सम्मान पर असर डालता है? "जाति है कि जाती नहीं?" यह सूत्रवाक्य इस संदर्भ में इसलिए सटीक लगता है क्योंकि, जबकि CJI का पद सर्वोच्च न्यायिक पद है, फिर भी जाति और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर उनके साथ भेदभाव किया गया। इस मामले ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या आज भी हमारे समाज में जातिवाद के प्रभाव से मुक्ति नहीं मिल पाई है? CJI के साथ इस व्यवहार को देखकर एक और गंभीर सवाल उठता है – क्या कार्य और कारण का संबंध इस प्रकार के भेदभाव से प्रभावित होता है? जब हम किसी पद पर बैठे व्यक्ति का सम्मान करते हैं, तो क्या उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि को दरकिनार कर कार्य कारण संबंध पर ही ध्यान देना चाहिए?