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"क्या जाति है या कोई जाति नहीं है?" क्या यह आदर्श वाक्य इस मामले में उपयुक्त है?#latest_news
Ashok Pawar MD
(MAHARSHATRA, MUMBAI CITY)
"क्या जाति है या कोई जाति नहीं है?" क्या यह आदर्श वाक्य इस मामले में उपयुक्त है?#latest_news
मौजा रेडवा येथील गोवर्धन सावध यांच्या घरातून अज्ञात चोराने 36 हजार रुपयांची चोरी करून लंपास तालुका रिपोर्टर रामदत राठोड
आज बहुजन क्रांती दलित संघटनेच्या वतीने गर्भपात प्रकरणी जसा डॉक्टर व साथीदार एजंट यांच्या गुन्हा दाखल झाला तसा आईवडील यांचेवर ही गुन्हा नोंद करा .तीव्र आंदोलन इशारा.
आज जिल्हाधिकारी कार्याल यावर वाहतूक संघटना ने ई- चलन विरोधात घोषणाबाजी करत जिल्हाधिकारी यांना निवेदन देऊन 15ऑगस्त ला आमरण उपोषणाचा इशारा दिला.
आज करवीर तालुक्यातील स्वाभिमानी संघटनेच्या वतीने 18 गावातील शेतकऱ्यांनी जिल्हाधि कारी यांना शक्तीपीठ विरोधात निवेदन दिले व आत्मदहन करण्याचा इशारा दिला.
आज कोल्हापूर मध्ये कोल्हापूर परिक्षेत्रीय पोलीस कार्यक्रम मेळावा उद्घाटन पार पडला त्याप्रसंगी विषेश पोलीस महानिरीक्षक बोलताना.
हंडरगुळी येथे महाविद्यालयात विद्यार्थी पोलीस संवाद उपक्रम,वाढवणा पोलिसांनी केले सविस्तर मार्गदर्शन
औसा दोन गटात राडा, व्हायरल व्हिडिओ, कारण अद्याप स्पष्ट, औसा शहरातल्या अजिंक्य होंडा शोरुम जवळ दोन गट भिडले
बेंगळुरू येथे 7 ऑगस्ट ला राष्ट्रीय ओबीसीचे महासंघाचे महाअधिवेशनात सहभागी व्हा:महासचिव सचिन राजूरकर
● महाराष्ट्र - संभाजीनगर के बस स्टैंड पर एक महिला यात्री को अचानक दिल का दौरा पड़ गया, मुश्किल
शिंगणापूर येथील शाकंभरी काॅलनीतील बंद बंगल्यात पार्टी करून त्याच बंगल्यातील साहीत्य चोरी दोघांना जेरबंद केले करवीर पोलीसांनी.
Comments (1)
Ashok Pawar MD
20 May, 2025"Is there a caste or is there no caste?" Is this motto appropriate in this case? हाल ही में चर्चा का विषय बने एक मामले में, जब भारत के मुख्य न्यायधीश (CJI) ने महाराष्ट्र में प्रोटोकॉल की अनदेखी का सामना किया, तो यह सवाल उठता है – क्या जाति और कार्य कारण संबंध में कोई फर्क है? CJI, जो दलित समाज से आते हैं, को महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल का सम्मान नहीं दिया गया। यह घटना न केवल एक अहम राजनैतिक और सामाजिक मुद्दा बन गई, बल्कि इसने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या किसी व्यक्ति की जाति उनके कार्य, अधिकार और सम्मान पर असर डालता है? "जाति है कि जाती नहीं?" यह सूत्रवाक्य इस संदर्भ में इसलिए सटीक लगता है क्योंकि, जबकि CJI का पद सर्वोच्च न्यायिक पद है, फिर भी जाति और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर उनके साथ भेदभाव किया गया। इस मामले ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या आज भी हमारे समाज में जातिवाद के प्रभाव से मुक्ति नहीं मिल पाई है? CJI के साथ इस व्यवहार को देखकर एक और गंभीर सवाल उठता है – क्या कार्य और कारण का संबंध इस प्रकार के भेदभाव से प्रभावित होता है? जब हम किसी पद पर बैठे व्यक्ति का सम्मान करते हैं, तो क्या उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि को दरकिनार कर कार्य कारण संबंध पर ही ध्यान देना चाहिए?