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"क्या जाति है या कोई जाति नहीं है?" क्या यह आदर्श वाक्य इस मामले में उपयुक्त है?#latest_news

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Ashok Pawar
Ashok Pawar MD
20 May, 2025

"Is there a caste or is there no caste?" Is this motto appropriate in this case? हाल ही में चर्चा का विषय बने एक मामले में, जब भारत के मुख्य न्यायधीश (CJI) ने महाराष्ट्र में प्रोटोकॉल की अनदेखी का सामना किया, तो यह सवाल उठता है – क्या जाति और कार्य कारण संबंध में कोई फर्क है? CJI, जो दलित समाज से आते हैं, को महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल का सम्मान नहीं दिया गया। यह घटना न केवल एक अहम राजनैतिक और सामाजिक मुद्दा बन गई, बल्कि इसने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या किसी व्यक्ति की जाति उनके कार्य, अधिकार और सम्मान पर असर डालता है? "जाति है कि जाती नहीं?" यह सूत्रवाक्य इस संदर्भ में इसलिए सटीक लगता है क्योंकि, जबकि CJI का पद सर्वोच्च न्यायिक पद है, फिर भी जाति और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर उनके साथ भेदभाव किया गया। इस मामले ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या आज भी हमारे समाज में जातिवाद के प्रभाव से मुक्ति नहीं मिल पाई है? CJI के साथ इस व्यवहार को देखकर एक और गंभीर सवाल उठता है – क्या कार्य और कारण का संबंध इस प्रकार के भेदभाव से प्रभावित होता है? जब हम किसी पद पर बैठे व्यक्ति का सम्मान करते हैं, तो क्या उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि को दरकिनार कर कार्य कारण संबंध पर ही ध्यान देना चाहिए?

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