Now Playing
बीएचयू में पीएचडी छात्र के एडमिशन को लेकर बवाल, करणी सेना ने दी चेतावनी#politics
Ashok Pawar MD
(UTTAR PRADESH, VARANASI)
बीएचयू में पीएचडी छात्र के एडमिशन को लेकर बवाल, करणी सेना ने दी चेतावनी#politics
स्थापना पखवाड़ा के तहत अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद ने किया शरबत वितरण
स्थापना पखवाड़ा के तहत अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद ने किया शरबत वितरण*
संत शिरोमणि सदगुरु कबीर साहब की 628 वीं जयंती#Giridih
वेलतूर तुकूम तरुण शेतकरी व माजी सरपंच दिगाबर धानोरकर यांना कृषी अधिकाऱ्यांच्या वेळेत पेरणीचा सल्ला
▶️ .....जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के अथोली थाने में बुधवार को सेना और पुलिस के बीच गंभीर टकराव हो गया,
▶️...कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट ,जमकर चले लात-घूंसे और जूते-चप्पल अलीगढ़, उत्तर प्रदेश: कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस
▶️....दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेस वे पर सहारनपुर (यूपी) में रोड एक्सीडेंट में 3 लोगों की मौत हो गई। Tiago कार बैक हो रही थी, तभी स्कॉर्पियो की टक्कर लग गई।
▶️...लखनऊ के चिनहट थाना क्षेत्र में BBD के पास स्थित हिमालयन कोल्ड स्टोर में लगी भीषण आग, पुलिस, NDRF, SDRF और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर।
पल्स पोलियो अभियान की सफलता को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों के साथ प्रभारी का समीक्षा बैठक
उत्तर प्रदेश दिन भर की खबरें
Comments (1)
Ashok Pawar MD
20 Apr, 2025Chaos over admission of PhD student in BHU, Karni Sena issues warning वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में पीएचडी छात्रा अर्चिता के एडमिशन को लेकर चल रहे विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। करनी सेना इस मामले में खुलकर सामने आ गई है और BHU प्रशासन को सीधी चेतावनी दी है। करनी सेना के प्रदेश अध्यक्ष राकेश रघुवंशी ने एक वीडियो जारी कर BHU प्रशासन से कहा है कि यदि सोमवार तक छात्रा के एडमिशन मामले में निर्णय नहीं लिया गया, तो करनी सेना के कार्यकर्ता BHU पहुंचकर आंदोलन करेंगे। रघुवंशी ने कहा: "अगर छात्रा को न्याय नहीं मिला तो करनी सैनिक विश्वविद्यालय में उतरेंगे। हम अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे।" वहीं छात्रा अर्चिता का आरोप है कि एडमिशन प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और इसी के विरोध में वह लगातार धरने पर बैठी हुई हैं। BHU प्रशासन की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन बढ़ते तनाव को देखते हुए कैंपस में सुरक्षा बढ़ाई गई है। यह मामला अब न केवल विश्वविद्यालय तक सीमित है, बल्कि सामाजिक संगठनों और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है