Now Playing
अमेरिका ने अवैध रूप से रह रहे नेपाली नागरिकों को बिना किसी बेड़ी या हथकड़ी के चार्टर प्लेन से नेपाल भेज दिया#politics
Ashok Pawar MD
(DELHI, NEW DELHI)
अमेरिका ने अवैध रूप से रह रहे नेपाली नागरिकों को बिना किसी बेड़ी या हथकड़ी के चार्टर प्लेन से नेपाल भेज दिया#politics
नई दिल्ली — लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की घोषणा के अनुसार, लोकसभा का मानसून सत्र संक्षिप्त#politics
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने पुराने वाहनों के लिए ईंधन प्रतिबंध संबंधी भाजपा के 'तुगलकी फरमान' की आलोचना की नई दिल्ली - आम आदमी पार्टी (आप) नेता सौरभ भारद्वाज ने भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा की तीखी#politics
नितिन गडकरी का बड़ा बयान: "देश में गरीबों की संख्या बढ़ रही है और धन चंद अमीरों के हाथों में केंद्रित हो रहा है"#political
#politics
भारत का दर्शन 'वसुधैव कुटुंबकम' है, योग इसका व्यावहारिक रूप है: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
बिहार में पीएम मोदी: आरजेडी और कांग्रेस पर डॉ. अंबेडकर का अपमान करने का आरोप, दलित-महादलित समुदाय की रक्षा का संकल्प लिय
पाकिस्तान में सत्ता का खेल: क्या शहबाज शरीफ को सत्ता से हटाने के लिए आसिम मुनीर को ट्रंप का समर्थन प्राप्त है? - शेष पॉल
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा: प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 35 मिनट तक टेलीफोन पर बातचीत हुई
फास्टैग वार्षिक पास योजना शुरू - अब साल में सिर्फ ₹3,000 में 200 हाईवे यात्राएं करें
बढ़ती बेरोजगारी के बीच राहुल गांधी के जन्मदिन पर युवा कांग्रेस रोजगार मेला आयोजित करेगी#politics
Comments (1)
Ashok Pawar MD
08 Mar, 2025Insult to India: Special treatment for foreigners but neglect for our citizens आज खबरों में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें अमेरिका ने अवैध रूप से रह रहे नेपाली नागरिकों को बिना किसी बेड़ी या हथकड़ी के चार्टर प्लेन से नेपाल भेज दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें सम्मानपूर्वक उनके देश वापस भेजा गया। यह वही अमेरिका है जिसने इससे पहले चीन के नागरिकों को भी इसी तरह सम्मानजनक तरीके से चार्टर प्लेन से भेजा था, न कि किसी असुविधाजनक मिलिट्री जहाज़ में बांध कर। साथ ही, कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने अमेरिका के सेना के विमान को अपने देश में उतरने की अनुमति नहीं दी और अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए खुद का विमान भेजा। इसी तरह वेनेज़ुएला ने भी अपने नागरिकों को लौटाने के लिए उचित कदम उठाया था। लेकिन भारत की स्थिति कुछ अलग है। क्या हमें अपने नागरिकों की इज्जत और सम्मान की इतनी चिंता नहीं है कि हम बोल भी नहीं पा रहे? क्या हमारी सरकार को इस पर कोई असर नहीं पड़ता? या फिर क्या मोदी जी सैर-सपाटे में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा? जो भी हो, यह भारतीय सम्मान का घोर अपमान है। यह देखकर गहरी निराशा होती है कि हमारे नागरिकों को इस तरह की अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ता है, जबकि दूसरे देशों ने अपने नागरिकों के लिए उचित सम्मान का परिचय दिया।